मुख्यमंत्री का चुनाव (Assembly Election) कैसे होता है | योग्यता | आयु | नियुक्ति | अधिकार | सैलरी

मुख्यमंत्री का चुनाव (Assembly Election) से संबंधित जानकारी

भारतीय संविधान में राज्यों का प्रशासन सुचारु ढंग से चलाने के लिए मुख्यमंत्री का निर्वाचन किया जाता है | प्रत्येक पांच वर्ष के पश्चात निर्वाचन आयोग के द्वारा नयी विधानसभा के गठन हेतु राज्यों में चुनाव कराये जाते है | इस चुनाव में जिस दल को बहुमत प्राप्त होता है, उस दल के नेता को राज्य पाल के द्वारा सरकार बनाने के लिए निमंत्रण दिया जाता है | इसके बाद नयी विधान सभा का गठन होता और राज्य में नए मुख्यमंत्री के द्वारा प्रशासन चलाया जाता है | इस पेज पर मुख्यमंत्री का चुनाव कैसे होता है, योग्यता, आयु, नियुक्ति, अधिकार, वेतन, के विषय में जानकारी दे रहे है |

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मुख्यमंत्री का चुनाव कैसे होता है (How Chief Minister Elected)?

संविधान के अनुसार प्रत्येक विधान सभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है | पांच वर्ष पूर्ण होने से पहले ही निर्वाचन आयोग के द्वारा राज्य में विधानसभा चुनाव कराने की घोषणा की जाती है | इस घोषणा के साथ निर्वाचन आयोग के द्वारा राज्य में अचार संहिता लगा दी जाती है | इसके अंतर्गत राज्य के सभी राजनैतिक दलों को कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है |

निर्वाचन आयोग निर्धारित तिथि को चुनाव का आयोजन करता है | इस चुनाव में प्रत्येक राजनैतिक दल के द्वारा चुनाव लड़ा जाता है | चुनाव परिणाम में जिस दल को बहुमत प्राप्त होता है | राज्य पाल के द्वारा उसे ही सरकार बनाने का निमंत्रण दिया जाता है |

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बहुमत क्या होता है (What is the Majority)

बहुमत किसी राज्य में कुल विधान सभा की सीटों की संख्या में एक और जोड़ने पर प्राप्त होता है | बहुमत का अर्थ आधे से अधिक होता है | यदि किसी राज्य में 100 विधान सभा सीटें है, तो उस राज्य में बहमत की संख्या 100/2+1 = 51 होती है |

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बहुमत न प्राप्त होने पर क्या होता है (What Happens When a Majority Is Not Obtained)

यदि राज्य के किसी भी दल को बहुमत प्राप्त नहीं होता है, तो एक से अधिक दल मिलकर गठबंधन करते है | अगर गठबंधन करने पर बहुमत का आकड़ा प्राप्त हो जाता है, गठबंधन के नेता बहुमत की संख्या या इससे अधिक विधायकों के समर्थन की सूची राज्यपाल को सौपतें है, इसके बाद राज्य पाल के द्वारा सरकार बनाने का निमंत्रण प्रदान किया जाता है |

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गठबंधन न हो पाने पर क्या होता है (What Happens if the Alliance is not done)

यदि किसी राज्य में विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को बहुमत प्राप्त नहीं होता है और कोई भी राजनैतिक दल गठबंधन से सरकार का गठन नहीं करना चाहता है, तो राज्यपाल की सिफारिश पर उस राज्य में राष्ट्रपति शासन को लगा दिया जाता है | यह राष्ट्रपति शासन राज्य में छ: महीने के लिए लगाया जाता है | इस अवधि के अंदर निर्वाचन आयोग के द्वारा पुनः चुनाव का आयोजन किया जाता है | इस चुनाव में जिस दल को बहुमत प्राप्त होता है, उसे राज्य पाल सरकार बनाने का निमंत्रण प्रदान करते है |

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मुख्यमंत्री की चयन प्रक्रिया (Selection Process Of Chief Minister)

जब किसी दल या गठबंधन को बहुमत प्राप्त हो जाता है, उस दल या गठबंधन के द्वारा जीतें हुए विधायकों के साथ एक बैठक का आयोजन किया जाता है | इस बैठक में सर्वसम्मति से जीतें हुए विधायकों के द्वारा अपना नेता को चुना जाता है | यही नेता मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण करता है और राज्य की विधान सभा में कैबिनेट और राज्य मंत्री के पद के लिए मंत्रियों का चयन करता है |

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मुख्यमंत्री की योग्यता (Chief Minister Eligibility)

भारतीय संविधान में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी भी योग्यता का उल्लेख नहीं किया गया है | राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में चुने गए व्यक्ति को विधान मंडल का सदस्य होना अनिवार्य है | यदि वह राज्य के विधान मंडल का सदस्य नहीं है, तो उसे छः महीने के अंदर विधान मंडल का सदस्य बनना अनिवार्य है नहीं तो वह मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रह सकता है | जिस राज्य में मुख्यमंत्री विधानसभा का सदस्य नहीं होता है, तो उसे विधान परिषद का सदस्य बनाया जाता है |

विधान परिषद का सदस्य बनने के बाद ही छः महीने से अधिक समय के लिए मुख्यमंत्री बन सकता है | उच्चतम न्यायालय द्वारा 21 सितम्बर 2001 को दिए गये एक निर्णय के अनुसार किसी सज़ायाफ़्ता को मुख्यमंत्री पद के लिए अयोग्य माना जाएगा।

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मुख्यमंत्री के लिए आयु (Age For Chie Minister)

मुख्यमंत्री बनने के लिए व्यक्ति की आयु 25 वर्ष या उससे अधिक होनी अनिवार्य है | 25 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को मुख्यमंत्री के पद पर चयनित नहीं किया जा सकता है | मुख्यमंत्री के पास विशेष अधिकार होते है, जिसके द्वारा वह अपने मंत्रियों और उनके विभागों का निर्धारण करता है | 21 सितम्बर, 2001 को सुप्रीम कोर्ट ने सजा पाए हुए व्यक्ति को मुख्यमंत्री के पद के लिए अयोग्य माने जाने का आदेश पारित किया था |

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मुख्यमंत्री की नियुक्ति (Appointment Of Chief Minister)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163 के अंतर्गत राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करने की शक्ति रखता है | इसके लिए राज्यपाल अपने समक्ष उसे शपथ ग्रहण करवाते है, जिसके बाद ही वह मुख्यमंत्री के पद पर कार्य कर सकता है | यदि किसी राजनैतिक दल में आन्तरिक मतभेदों के कारण मुख्यमंत्री के द्वारा त्याग पत्र दिया जाता है तो राज्यपाल उस दल के नए चुने हुए नेता को मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण करवाते है |

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मुख्यमंत्री के अधिकार (Rights Of Chief Minister)

  • संविधान के अनुसार राज्य का प्रमुख राज्य पाल होता है, परन्तु वास्तविक रूप से राज्य पाल की शक्तियों का प्रयोग मुख्यमंत्री के द्वारा किया जाता है |
  • राज्य का प्रशासन वास्तविक रूप से मुख्यमंत्री के द्वारा संचालित किया जाता है | यदि विधान सभा के द्वारा किसी विधेयक को पास किया जाता है तो उस पर स्वीकृति राज्य पाल के द्वारा बाध्यकारी रूप से देना अनिवार्य है |
  • राज्य में लागू होने वाले प्रत्येक कानून मुख्यमंत्री से प्रभावित होता है |
  • कैबिनेट द्वारा लिए गए प्रत्येक निर्णय पर मुख्यमंत्री की स्वीकृति अवश्य होती है |
  • यदि किसी मंत्री या कैबिनेट मंत्री के द्वारा मुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना की जाती है, तो मुख्यमंत्री राज्य पाल के माध्यम से उससे त्याग पत्र ले सकता या पद से बर्खास्त करवा सकता है |
  • मुख्यमंत्री के द्वारा अपने मंत्रियों के कार्यों की समीक्षा की जाती है यदि वह जनता की इच्छा के अनुरूप कार्य नहीं कर पाते है, तो मुख्यमंत्री राज्य पाल के माध्यम से उससे त्याग पत्र ले सकते है |
  • वह अपने सभी मंत्रियों के कार्यों का औचक निरीक्षण कर सकते है |
  • विपक्ष के द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर आवश्यकता होने पर वह स्वयं देते है |
  • मुख्यमंत्री की सलाह पर विधानसभा का विखंडन राज्यपाल के द्वारा किया जाता है |

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मुख्यमंत्री का वेतन (Chief Minister Salary)

भारतीय संविधान में अनुच्छेद 164 के अंतर्गत मुख्यमंत्री के वेतन का प्रावधान दिया गया है, इसके अनुसार ही वेतन का निर्धारण किया जाता है | इन्हें मूल वेतन के अतिरिक्त अन्य कई भत्ते प्रदान किये जाते है, जैसे-  निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, व्ययविषयक भत्ता (कर मुक्त) तथा दैनिक भत्ता इत्यादि प्रदान किया जाता है | राज्यों की विधान सभा के द्वारा मुख्यमंत्री का वेतन निर्धारित किया जाता है अतः यह प्रत्येक राज्य में अलग- अलग होता है |

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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री का वेतन (Chief Minister’s salary in U. P.)

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को प्रति माह 1 लाख  64 हजार रुपये प्रदान किये जाते है, इस धनराशि में मूल वेतन और भत्तों को शामिल किया जाता है, जो इस प्रकार है-

  • 40 हजार रुपये मूल वेतन
  • 50 हजार रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता
  • 30 हजार रुपये चिकित्सा प्रतिकर भत्ता
  • 20 हजार रुपये सचिवालय भत्ता
  • 800 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 24 हजार रुपये दैनिक भत्ता

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मुख्यमंत्री की पेंशन (Pension Of Chief Minister)

भारतीय संविधान में राज्य के मुख्यमंत्री को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्रदान करने की व्यवस्था की गयी है | पेंशन की धनराशि सम्बंधित विधानसभा के द्वारा निर्धारित की जाती है, जिसके कारण यह अलग- अलग रहती है | किसी भी मुख्यमंत्री की मृत्यु होने के उपरांत  पेंशन की धनराशि पति या पत्नी को प्रदान की जाती है|

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