एक देश एक चुनाव क्या है | One Nation One Election Explained in Hindi

एक देश एक चुनाव से सम्बंधित जानकारी

वर्तमान समय में एक देश-एक चुनाव को लेकर देश में चारो ओर तरह-तरह की चर्चायें हो रही है | हालाँकि कुछ राजनीतिक पार्टियाँ इससे पूरी तरह से सहमत है और कुछ इसके खिलाफ, कई पार्टियाँ ऐसी भी जिन्होनें इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है | दरअसल 16वीं लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीत दर्ज़ करने के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, तभी से इस मुद्दे पर बहस जारी है |

हाल ही में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित कर ‘एक देश एक चुनाव’ की व्यवस्था को लागू करने का आह्वान किया, इसके साथ ही एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक देश एक चुनाव’ की बात छेड़ी है | आखिर यह एक देश एक चुनाव क्या है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों में हलचल की स्थिति बनी हुई है | तो आएये जानते है, एक देश एक चुनाव क्या है?

आचार संहिता क्या है

एक देश एक चुनाव क्या है (What Is One Nation One Election)

एक देश एक चुनाव का मतलब यह है, कि संसद, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव पूरे देश में एक साथ और एक ही समय पर कराये जाये, कहनें का आशय यह है कि लोग एक ही दिन में सरकार या प्रशासन के तीनों स्तरों के लिए मतदान करेंगे |

देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर काफी समय से बहस जारी है | प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसका समर्थन करते हुए इस मामले पर चुनाव आयोग, नीति आयोग, विधि आयोग और संविधान समीक्षा आयोग बातचीत कर चुके हैं, परन्तु देश के सभी राजनीतिक दल इससे सहमत नहीं है |

सरकार का मानना है, कि देश में हर समय चुनावी माहौल बना रहता है, एक चुनाव के समाप्त होनें पर दूसरा शुरू हो जाता है। देश के किसी न किसी हिस्से में कुछ महीनों के बाद चुनाव होते रहते हैं | पिछले लगभग तीन दशकों में कोई साल ऐसा नहीं गया, जब चुनाव आयोग ने किसी न किसी राज्य में कोई चुनाव न करवाया हो|

देश में अलग-अलग चुनाव करानें से देश पर आर्थिक रूप से बोझ पड़ता है, इसके साथ ही चुनाव के लिए संसाधन, सिक्युरिटी फोर्स, ब्यूरोक्रेसी और पॉलिटिकल मशीनरी को कई दिनों के लिए इधर-उधर भेजना पड़ता है| यदि यह सभी चुनाव एकसाथ करा लिए जाते हैं तो देश एक बड़े बोझ से मुक्त हो जाएगा |

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एक देश एक चुनाव से लाभ (Benefits From One Nation One Election)

‘एक देश एक चुनाव’ को लेकर कुछ विद्वान और जानकार इससे सहमत हैं और कुछ असहमत है, दोनों के अपने-अपने तर्क हैं | यदि देश में एक देश एक चुनाव लागू हो जाता है, तो इससे होनें वाले लाभ इस प्रकार है-

  • देश में अलग-अलग चुनाव करानें के बजाय यदि सभी चुनाव एक साथ कराये जाते है, तो चुनाव में खर्चा कम होगा, इसके साथ ही यह लोगों और सरकारी तंत्र के समय व संसाधनों की भी बड़ी बचत होगी|
  • किसी भी स्तर पर होनें वाले चुनाव के समय सम्बंधित क्षेत्र में आचार संहिता लागू कर दी जाती है, जिससे सभी विकास के कार्यों में विराम लग जाता है|
  • चुनाव आयोग और सीबीआई द्वारा दी गयी रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो चुका है, कि चुनाव के दौरान भारी मात्र में काले धन को खपाया जाता है| सभी चुनाव एक ही बार में संपन्न होनें से काले धन खापनें पर स्वतः ही लगाम लग जायेगा|
  • एक चुनाव होनें से स्कूल, कॉलेज के साथ-साथ ​अन्य विभागों के सरकारी कर्मचारियों का समय और कार्य प्रभावित नहीं होगा, जिससे यह सभी संस्थाएं सुचारू रूप से कार्य कर सकेंगी|

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देश में पहले भी एक साथ हो चुके हैं चुनाव (Elections Held Simultaneously in the Country Before)

देश में सभी चुनाव एक साथ करानें का मुद्दा न्य नहीं है, इसे पहले 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हो चुके हैं, परन्तु यह सिलसिला 1968-69 में तब टूट गया, जब कुछ राज्यों की विधानसभाएं अपनें निर्धारित समय से पहले ही भंग हो गई |

वर्ष 1969 में कांग्रेस का विभाजन हुआ और 1971 में इंदिरा गांधी ने लोकसभा भंग कर दी और मध्यावधि चुनाव की घोषणा कर दी, जबकि आम चुनाव कराए जाने के लिये एक साल का समय बाकी था। इस प्रकार पहली बार लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होने का सिलसिला पूर्णत: भंग हो गया |

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