भारत के नागरिक के मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) क्या है | पूरी जानकारी – हिंदी में

मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) से सम्बन्धित जानकारी

भारतीय संविधान के तीसरे भाग में भारतीय नागरिको को प्रदान किये गए मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है, तथा इन मूल अधिकारों की सुरक्षा का उत्तरदायित्व  उच्च न्यायालय का है इन मूल अधिकारों के द्वारा सभी भारतीय नागरिको को समानता तथा भारत देश में स्वतंत्र नागरिक होने का अधिकार प्राप्त है| नागरिको के सभी मूल अधिकारों का वर्णन भारतीय संविधान में उपलब्ध है| भारतीय संविधान का जनक डॉ भीम राव अम्बेडकर को कहा जाता है तथा इनके अथक प्रयासों के फलस्वरूप भारतीय संविधान इस रूप में तैयार हो पाया | 26 जनवरी 1950 को यह संविधान लागू किया गया था, भारतीय संविधान पूरे विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है जिसे भारत के साथ-साथ विश्व के अन्य देशो ने भी सराहा और अपनाया है, इस संविधान को निर्मित करने में 2 वर्ष 11 महीने तथा 18 दिन का समय लगा था तथा डॉ भीम राव अम्बेडकर के 125वे जयंती वर्ष पर 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में बनाये जाने का निर्णय पहली बार लिया गया था|    

मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)

मौलिक अधिकार देश के प्रत्येक नागरिक को सामान रूप से प्राप्त है, किसी भी स्थिति में सरकार के द्वारा इसे संकुचित नहीं किया जा सकता है तथा नागरिको के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिए ये अति आवश्यक है| मूल संविधान में सात मौलिक अधिकार दिए गए थे लेकिन 1978 में 44 वें संवैधानिक संशोधन के बाद छह मौलिक अधिकार कर दिए गए, “संपत्ति के अधिकार” को संविधान के तीसरे भाग से हटा दिया गया है| मौलिक अधिकारों को संविधान के भाग 3 के अनुच्छेद 12 से 35 तक वर्णित किया गया है तथा नागरिको के इन मौलिक अधिकारों को संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है| देश के प्रत्येक नागरिक को अपने मौलिक अधिकारों के विषय में जानकारी होनी चाहिए तथा इन अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता, जो इस प्रकार है 

1. समानता का अधिकार (Right To Equality)

  • अनुच्छेद 14 से 18 के अंतर्गत समानता का अधिकार ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है |
  • कानून के समक्ष समानता तथा भारत की सीमा क्षेत्र के अंतर्गत सभी को कानून का समान संरक्षण|
  • धर्म, जाति, लिंग या मूलवंश  के आधार पर सार्वजानिक स्थानों तथा वस्तुओ में भेदभाव करना वर्जित है तथा महिलाओ, बच्चो, अनुसूचित जातियों, जनजातियों की सहायता एवं सुरक्षा का प्रावधान है|
  • सार्वजनिक नौकरी तथा रोजगार के अवसर में समानता प्रत्येक व्यक्ति को प्राप्त है तथा जिन वर्गों का प्रतिनिधत्व पर्याप्त नहीं है सरकार आवश्यकता अनुसार उन वर्गों को आरक्षण प्रदान कर सकती है|
  • इस अनुच्छेद में अस्पृश्यता का उन्मूलन किया गया है और इस प्रथा को निषेध किया गया है|
  • सैन्य और शैक्षणिक क्षेत्रों को छोड़कर अन्य पदों की समाप्ति कर दी गयी है|

2. स्वतंत्रता का अधिकार (Right To Freedom)

अनुच्छेद 19 से 22 के अंतर्गत नागरिको को स्वतंत्रता सम्बन्धी अधिकार प्राप्त है तथा अनुच्छेद 19 के अंतर्गत 6 अधिकार दिए गए है:-

  1. भाषण और विचार अभिव्यक्ति का अधिकार (अनुच्छेद 19)
  2. बिना हथियारों  के शांतिपूर्वक सभा तथा सम्मेलन करने का अधिकार (अनुच्छेद 19)
  3. संस्थाए या संघ बनाने का अधिकार (अनुच्छेद 19)
  4. पूरे भारत के किसी भी क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार (अनुच्छेद 19)
  5. पूरे देश के किसी भी स्थान पर निवास का अधिकार (अनुच्छेद 19)
  6.  कोई भी व्यापार या व्यवसाय या रोजगार करने व् संचालित करने का अधिकार (अनुच्छेद 19)
  7. अपराध सिद्ध होने पर अपराधों की  सजा के संबंध में संरक्षण का अधिकार 
  8. अपने प्राणो की सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
  9. 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने का अधिकार
  10. कुछ स्थितियों में गिरफ़्तारी के बाद हिरासत में रखने के प्रावधान से संरक्षण का अधिकार

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right Against Exploitation)

अनुच्छेद 23 तथा 24 में शोषण के विरुद्ध अधिकार वर्णित है

·        मानव के साथ नशीली दवाओं का अवैध व्यापार तथा शक्तिपूर्वक जबरन मजदूरी करवाने एवं बालश्रम को रोकने के विरुद्ध अधिकार |

·        14 वर्ष से कम आयु के बच्चो के द्वारा कारखानों, खाधानों तथा रोजगार में सम्मिलित करने के विरुद्ध अधिकार|

4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Right To Freedom of Religion)

अनुच्छेद 23 से 28  के मध्य धर्म स्वतंत्रता के अधिकार को वर्णित किया गया है वह इस प्रकार है

  • अंतरात्मा की स्वतंत्रता तथा किसी भी धर्म को अपनाने, मानने तथा प्रचार करने की स्वतंत्रता का अधिकार|
  • धार्मिक कर्म के लिए संस्थाओ के स्वामित्व, नियंत्रण, प्रबंधन तथा स्थापना की स्वतंत्रता का अधिकार|
  • किसी विशिष्ट धर्म के प्रचार-प्रसार लिए करों के विषय में स्वतंत्रता का अधिकार।
  • शिक्षण संस्थानों के धार्मिक शिक्षा या पूजा-अर्चना में उपस्थित होने की स्वतंत्रता का अधिकार| 

5. सांस्कृतिक तथा शिक्षा सम्बंधित अधिकार (Cultural & Educational Rights)

अनुच्छेद 29 तथा 30 के अंतर्गत सांस्कृतिक तथा शिक्षा सम्बंधित स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन किया गया है वह इस प्रकार है

  • किसी भी समुदाय के व्यक्तियों को अपनी भाषा, लिपि तथा संस्कृति को सुरक्षित एवं बचाए रखने की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 29)
  • अल्पसंख्यकों के अपने वर्ग के हितो के संरक्षण का अधिकार  (अनुच्छेद 29)
  • अल्पसंख्यकों -वर्गों का शिक्षा संस्थानों की स्थापना तथा उसके प्रशासन की स्वतंत्रता का अधिकार  (अनुच्छेद 30)

6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies)

अनुच्छेद 32 से 35 के अंतर्गत संवैधानिक उपचारों के अधिकार का वर्णन किया गया है तथा डॉ. बी आर अंबेडकर ने इस अनुच्छेद को  “संविधान की आत्मा” कहा है इस अधिकार के अंतर्गत 5 प्रकार के प्रावधान हैं

  • बंदी प्रत्यक्षीकरण के अंतर्गत हिरासत में लिए गए किसी व्यक्ति को न्यायालय में उपस्थित करने का आदेश न्यायालय के द्वारा दिया जाता है, अवैध तथा असंतोषजनक रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को न्यायालय के द्वारा मुक्त करने का आदेश दिया जाता है|
  • परमादेश उन परिस्थितियों में न्यायालय के द्वारा जारी किया जाता है जब किसी संस्था या पदाधिकारी के द्वारा कानूनी और संवैधानिक कर्तव्यों का पालन नहीं किया जा रहा होता है तब न्यायालय के द्वारा कार्य करने का आदेश दिया जाता है|
  • निषेधाज्ञा एक रिट है जो उच्च न्यायालय के द्वारा निचली अदालत को उसके अधिकार की सीमा के अंदर रहने के लिए जारी की जाती है|
  • जब किसी व्यक्ति के द्वारा अवैध रूप से किसी पद पर अधिकार कर लिया जाता है तब न्यायालय के द्वारा उस व्यक्ति को उस पद पर कार्य करने से रोकने के लिए अधिकार पृच्छा आदेश जारी किया जाता है|
  • जब बिना किसी अधिकार के सरकारी अधिकारी या निचली अदालत कोई कार्य करती है तो न्यायालय  उत्प्रेषण के द्वारा  उस विचाराधीन मामले को ऊपर की अदालत या सक्षम अधिकारी को सौप देती है |

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