पंचायत चुनाव की वोटिंग कैसे होती है | Panchayat Election Voting Process in Hindi | बीडीसी, ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य वोटिंग प्रक्रिया

पंचायत चुनाव की वोटिंग से सम्बंधित जानकारी

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा लगभग सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं| प्रदेश के सभी जिलों की आरक्षण सूची जारी होनें के बाद चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशी मतदाताओं को लुभानें का हर संभव प्रयास कर रहे है | आपको बता दें, कि इस चुनाव में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए इलेक्शन करवाए जाएंगे |

हालाँकि चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना अभी तक सार्वजानिक नहीं की गयी है | चूँकि पंचायती चुनाव प्रत्येक 5 वर्ष बाद कराये जाते है, और इन पांच वर्षो के दौरान बहुत से नये मतदाताओं को मतदान करने का अवसर प्राप्त होता है | ऐसे में इन नये मतदातों के मन में वोटिंग को लेकर अनेक प्रकार के प्रश्न उठते है, जैसे कि वोट कैसे डालते है? पंचायत चुनाव की वोटिंग कैसे होती है, इसके बारें में आपको यहाँ पूरी जानकारी दे रहे है|

चुनाव में वोटिंग कौन कर सकता है (Who Can Vote In Elections)

हमारे देश में तीन प्रकार लोकसभा (Lok Sabha), विधानसभा (Assembly) और पंचायत या नगर निगम (Panchayat or Municipal Corporation) के चुनाव संपन्न कराये जाते है| मुख्य रूप से यह सभी चुनाव पांच वर्षों में अंतराल में कराये जाते है, परन्तु कुछ खास परिस्थितियों में इन्हें निर्धारित समय से पहले भी कराया जाता है| यदि हम इस चुनावों में वोटिंग की बात करे, तो भारत में किसी भी प्रकार के होनें वाले चुनावों में 18 वर्ष की आयु पूरी करनें वाले नागरिक को मतदान (Voting) करनें का आधिकार है और यह अधिकार उन्हें संविधान द्वारा प्राप्त है|

दूसरे शब्दों में, भारतीय संविधान देश में रहनें वाले प्रत्येक नागरिक को वोटिंग करने का अधिकार देता है, जो अपनी 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका है|  वोटिंग अर्थात मतदान करनें के लिए आपको अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराना होता है, इसके पश्चात आपको अपना मतदाता पहचान पत्र बनवाना होता है, क्योंकि इन दोनों प्रक्रियाओं के बिना आप मतदान नहीं कर सकते है|  आपको बता दें, की चुनाव आयोग (Election Commission) सभी मतदाताओं को एक एक खास निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत होने का अधिकार प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत आप स्थायी या अस्थायी निवास में से किसी एक स्थान पर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करवा सकते है|

यदि हम पंचायती चुनाव की बात करे, तो इस चुनाव का आयोजन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है| इसके माध्यम से गांवों में ग्राम पंचायत और शहरों में निगम परिषद सदस्यों या पार्षदों (काउंसलर) का चुनाव होता है। इस चुनाव में मतदान करनें के लिए मतदाता को अपनें राज्य के एक खास निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत होना आवश्यक है| इसके साथ-साथ मतदाता के पास वोटर आई कार्ड होना चाहिए|

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पंचायत चुनाव की वोटिंग कैसे होती है (Panchayat Election Voting Process)

भारत में किसी भी प्रकार के होनें वाले चुनावों को तीन भागों में विभाजित किया गया है| जिसमें से पहला चरण नामांकन (Nomination), दूसरा चरण मतदान (Voting) और तीसरा चरण मतगणना (Counting) का होता है| पंचायती चुनावों में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है, और इस चुनाव को सम्पन्न करानें की पूरी जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की होती है|

पंचायती चुनाव में मुख्य रूप से मतदान प्रक्रिया प्रातः 7 बजे से शुरू होकर सायं 5 बजे तक होती है, हालाँकि कुछ विशेष परिस्थितियों के अनुसार मतदान समय को घटाया या बढ़ाया जा सकता है | प्रायः लोक सभा और विधान सभा इलेक्शन में वोटिंग के लिए ईवीएम मशीन का इस्तेमाल किया जाता है, परन्तु वर्ष 2021 में होनें वाले इन पंचायती चुनाव में बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जायेगा|

पंचायत चुनाव के नए नियम 

बीडीसी, ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य वोटिंग प्रक्रिया (BDC, Gram Pradhan, Zila Panchayat Member Voting Procedure)

  • इस इलेक्शन में वोटिंग के लिए मतदाताओं को आयोग द्वारा निर्धारित अपनें क्षेत्र के मतदान स्थल अर्थात बूथ पर जाना होता है |
  • बूथ में जानें के पश्चात आपको अपना वोटर कार्ड दिखाना होता है, जिसके आधार पर आपका नाम मतदाता सूची में देखा जाता है |
  • वोटिंग लिस्ट में आपका नाम मिलनें के पश्चात आपको प्रत्याशियों के अनुसार बैलेट पेपर दिए जाते है |
  • इसके पश्चात आपको एक टेबल जो तीन तरफ से बंद होती है, वहां जाकर आपको अपने मनपसंद प्रत्याशी के चुनाव चिन्ह पर एक विशेष प्रकार की मोहर लगानी होती है |
  • इसके बाद आपको बैलेट पेपर अर्थात मतपत्र को मोड़कर मतपेटी में डालना होता है |
  • इसके बाद बूथ के अंदर वोटर की उंगली पर एक विशेष प्रकार की इंक का निशान लगाया जाता है, जिसे इलेक्शन इंक या फॉस्फोरिक इंक कहते है | इस इंक का प्रयोग इसलिए किया जाता है,ताकि कोई भी मतदाता एक से अधिक वोट न डाल पाए |
  • इसके बाद मतदाता को बूथ से बाहर भेज दिया जाता है, इस प्रकार आपकी वोटिंग प्रक्रिया पूरी हो जाती है |

परिसीमन क्या होता है

वोटिंग प्रक्रिया संपन्न होनें के बाद मतपत्रों की काउंटिंग का कार्य किया जाता है | पंचायती चुनाव के अंतर्गत मतगणना प्रक्रिया अंतिम चरण के मतदान सम्पन्न होनें के 2 दिन बाद शुरू होती है | ऐसा इसलिए किया जाता है, यदि किसी कारणवश पुनः मतगणना करानें की स्थिति उत्पन्न होती है, तो मतगणना कर्मचारियों को समय से भेजकर पुनः काउंटिंग करायी जा सके |  

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