दिवाली (Diwali) क्या है | क्यों मनाते है | कब होता है दीपावली का पर्व | पूरी जानकारी

दिवाली (Diwali) से सम्बन्धित जानकारी

दीपावली भारत देश का सबसे बड़ा तथा प्राचीन हिन्दू त्योहार है तथा दीपावली को दीपपर्व भी कहते है, अर्थात दीपो तथा रौशनी का त्योहार| अध्यात्म के अनुसार यह अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है| यह त्यौहार सामाजिक तथा धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है| भारत देश में दीपावली के त्यौहार को जैन, सिख़ तथा बौद्ध धर्म के लोग भी मनाते है, तथा भारत देश के आलावा यह त्योहार विदेशो में भी मनाया जाता है| मुख्यरूप से बच्चो के लिए उल्लास तथा हर्ष का त्योहार है| अनार, फुलझड़िया , रॉकेट आदि पटाखों को देख कर सभी बच्चे खिल जाते है भारत वर्ष में प्रतिवर्ष 5 हजार करोड़ के पटाखे जलाये जाते है, तथा बड़ो के द्वारा घर की साफ- सफाई कर दीपो से घर को सजाया जाता है, तथा कपडे, मिठाई आदि सामानो की खरीदारी की जाती है यह त्यौहार 5 दिन का होता है जो धनतेरस से प्रारम्भ होकर भाईदूज पर समाप्त होता है, यहाँ पर आपको “दिवाली क्या है? क्यों मनाते है, कब होता है दीपावली का पर्व, पूरी जानकारी” उपलब्ध कराई गयी है|

दिवाली क्या है?

दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है, यह दीप तथा आवली दो शब्दों के मिश्रण से इसकी उत्पत्ति हुई है, जिसका अर्थ दियो की श्रृंखला होता है| दीपावली को दिवाली भी कहते है|भारतीय संस्कृति के अनुसार दिए को ज्ञान और सत्य के प्रतीक के रूप में  माना जाता है, क्योंकि वह स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है| धार्मिक पुस्तकों में दिए को ब्रह्मा स्वरूप माना गया है । प्रत्येक भाषा में दिवाली के अलग-अलग नाम है| जैसे नेपाली भाषा में तिहार, बंगाली में दीपबाली , सिंधी में दियारी आदि नामो से दिवाली को जाना जाता है| भारत देश में प्राचीन काल से यह त्योहार हिंदी के महीने कार्तिक में गर्मी में बाद की फसल के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है तथा शरद ऋतु में मनाया जाता है | दिवाली का उल्लेख स्कन्द तथा मध् पुराणों में भी मिलता है| हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक के महीने में सूर्य जो अलौकिक प्रकाश तथा ऊर्जा का दाता है वह अपनी स्थिति को परिवर्तित करता है |

दीपावली का पर्व कब मनाया जाता है?

दिवाली का त्यौहार कार्तिक मॉस की अमावस्या की तिथि को मनाया जाता है सामान्यतः यह पर्व अक्टूबर या नवंबर के महीने में यह त्योहार होता है इस दिन देवी लक्ष्मी तथा भगवन गणेश जी की पूजा होती है यह त्योहार 5 दिन का होता है| इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है, इसके बाद नरक चतुर्दर्शी, दिवाली, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (परेवा भी कहते है) तथा भाई दूज के बाद समाप्त होता है | धनतेरस के दिन लोग सोना- चांदी, कीमती वस्तुए तथा बर्तन इत्यादि की खरीदारी करते है, तथा नरक चतुर्दर्शी के दिन संध्याकाल में मुख्य द्वार तथा घर के आस –पास दिये जलाये जाते है| इसके बाद अगले दिन अमावस्या के दिन दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है तथा दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है, तथा पांचवे दिन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है | इस दिन सभी बहने अपने भाईयो को पूजा करके तिलक कर मिठाई खिलाती है | इस प्रकार दिवाली का त्योहार ख़ुशी के साथ मनाया जाता है|

दिवाली का त्योहार क्यों मनाया जाता है?

दिवाली भारत के साथ – साथ  अन्य देशो का भी लोकप्रीय त्योंहार के रूप में बनाया जाता है तथा हिन्दुओ के अतिरिक्त अन्य धर्मो में भी दिवाली मुख्य त्योहार के रूप में प्रतिवर्ष मनाई जाती है| दिवाली त्योहार मनाने के अनेको ऐतिहासिक तथा पौराणिक कारण है तथा अनेको कहानिया तथा परम्पराये उपलब्ध है |

  • इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम माता सीता तथा भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास व्यतीत कर अयोध्या वापस आये थे| अयोध्या की प्रजा ने पूरी अयोध्या में मिटटी के दीप प्रज्वलित कर भगवान श्रीराम के आने की ख़ुशी व्यक्त कर उनका स्वागत किया था|
  • राक्षसों तथा देवताओ के द्वारा क्षीर सागर के मंथन में देवी लक्ष्मी अमावस्या के दिन प्रकट हुई थी इसलिये माता लक्ष्मी के जन्मदिन के रूप में भी दिवाली का त्योहार मनाया जाता है|
  • दिवाली के त्योहार के नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था, तथा उसकी कैद से 16000 महिलाओ को मुक्ति तथा प्रजा को उसके अत्याचार से बचाया था इसलिए द्वारका की प्रजा ने दीपक जलाकर उनका धन्यवाद दर्शाया था|
  • कार्तिक मास की अमावस्या को पांडव 12 वर्ष के निष्कासन की अवधि पूर्ण कर अपने राज्य वापस लौटे थे इसलिए पांडवो की आने की ख़ुशी में राज्य की प्रजा के द्वारा दीप जलाकर अपनी ख़ुशी प्रदर्शित की थी|

दिवाली का त्योहार अन्य धर्मो में मानाने का कारण

  • जैन धर्म

आधुनिक जैन धर्म के संस्थापक रामतीर्थ, महावीर स्वामी जी को इस दिन मोक्ष की प्राप्ति हुई थी, तथा इसी दिन उनके प्रथम शिष्य गौतम गणधर को ज्ञान की प्राप्ति भी हुई थी| इस कारण जैन धर्म के लोगो के द्वारा इस दिन को दिवाली के रूप में मनाया जाता  है|

  • सिख़ धर्म

इसी दिन अमृतसर में वर्ष 1577 में स्वर्ण मंदिर की स्थापना की गयी थी तथा सिख्खो के तीसरे गुरु अमर दास के द्वारा दिवाली के दिन लाल पत्र को दिन के पारम्परिक रूप में बदल दिया था, इसलिए गुरुजनो का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सभी सिख़ इस दिन एकत्र होते है| वर्ष 1919 में सिख्खो के छटे गुरु हरगोविंद सिंह दिवाली के दिन सम्राट जहाँगीर की कैद से ग्वालियर के किले से आजाद हुए थे | इसलिए सिख्खो के द्वारा दिवाली का त्योहार मनाया जाता है|

  • मारवाड़ी तथा गुजराती

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार मारवाड़ी लोग अश्विन कृष्ण पक्ष के के आखरी दिन पर दिवाली का त्योहार अपने नए वर्ष की ख़ुशी के उपलक्ष के रूप में मनाते है,तथा चंद्र कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के पहले दिन गुजराती लोग अपने नये वर्ष के जश्न के रूप में मनाते है|

दिवाली त्यौहार का महत्व

दिवाली के त्योहार के आते ही  भारत देश में खरीदारी के  मौसम का प्रारम्भ हो जाता है इस दौरान सोने-चांदी के आभूषण, वाहन, महंगी वस्तुए आदि लोगो के द्वारा ख़रीदा जाता है, तथा दिवाली के उपलक्ष्य में उपहार के लिए मिठाईया, नए कपडे तथा सूखे मेवे के गिफ्ट पैक ख़रीदे जाते है लोगो के द्वारा एक दूसरे को उपहार देकर अपनी ख़ुशी दर्शाते है|  महिलाओ के द्वारा घर की साफ-सफाई कर साज सज्जा की जाती है तथा मुख्य द्वार पर रंगोली भी बनायीं जाती है बच्चो तथा बड़ों के द्वारा आतिशबाजी की जाती है पटाखे छुड़ाए जाते है| तथा दिवाली के दिन धन तथा समृद्धि की देवी लक्ष्मी तथा गणेश जी की पूजा विधि-विधान के साथ सम्पन्न की जाती है| पूरे परिवार, मित्रगण तथा परिजनों के साथ ख़ुशी के वातावरण में यह त्योहार मनाया जाता है|  

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