Diwali Holidays List in Hindi: दिवाली अवकाश की सूंची यहां देखें

Diwali Holidays List (दिवाली अवकाश की सूंची)

दिवाली का त्योहार सम्पूर्ण भारत वर्ष में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है| यह हिन्दुओ का प्रमुख त्योहार है, दिवाली का त्योहार पांच दिन तक मनाया जाता है| यह त्योहार धनतेरस से प्रारम्भ होता है, तथा इसका समापन भाई दूज पर माना जाता है| दिवाली के पांचो दिन में अलग अलग देवताओ की उनके रीती -रिवाज के आधार पर पूजा की जाती है पहले दिन धनतेरस, दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, तीसरे दिन दिवाली, चौथे दिन गोवेर्धन पूजा तथा अंतिम दिन भाईदूज मनाया जाता है | इस महा पर्व में विशेष रूप से घरो की तथा आस पड़ोस की सफाई होती है| घरो को लाइट की लड़ियो, दीपो, मोमबत्ती आदि से सजाया जाता है | घरो के द्वार पर रंगोली बनाई जाती है| घर में पकवान, मिठाईया आदि बनाई जाती है नए वस्त्र धारण करके पूजा में बैठा जाता है| यहाँ पर आपको Diwali Holidays List in Hindi: दिवाली अवकाश की पूरी जानकारी और दिवाली महापर्व के पांचो दिन के महत्व के विषय जानकारी उपलब्ध कराई गयी है|

दिनांकदिनत्योहार
12 नवम्बर 2020गुरुवारधनतेरस
13 नवम्बर 2020शुक्रवारनरक चतुर्दशी
14 नवम्बर  2020शनिवारदीपावली
15 नवम्बर 2020रविवारगोवर्धन पूजा
16 नवम्बर 2020सोमवारभाई दूज

धनतेरस

दिवाली पर्व का प्रारम्भ धनतेरस के त्योहार से होता है| कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदसी को यह त्योहार मनाया जाता है, इसलिए  इसे धन त्रयोदशी भी कहते है| धनतेरस के दिन क्षीर सागर के मंथन से भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था। भगवान धनवंतरी सभी रोगों के लिए एक हाथ में औषधि तथा दूसरे हाथ में पीतल का कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए थे। अतः इस दिन भगवान धनवंतरी की पूजा  श्रद्धापूर्वक की जाती है| जिससे आरोग्य तथा दीर्घ जीवन की प्राप्ति हो सके| धनतेरस के दिन पीतल के बर्तन खरीदना शुभ होता है, क्योकि यह भगवान् घन्वन्तरि की प्रिय धातु है, तथा इसके अतिरिक्त चांदी तथा सोने के आभूषण ख़रीदे जाते है| इसी दिन  झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है, तथा भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी तथा कुबेर जी की पूजा की जाती है| साथ में जो भी वस्तु खरीद कर लाई गयी होती है, उसे भी पूजा में रखा जाता है| इस दिन संध्या काल में  घर के मुख्य द्वार पर यमदेव केलिए अन्न से भरे पात्र में दक्षिण की ओर मुख करके दीपक रखने एवं उसकी  पूजा करके यमराज से प्रार्थना करने पर असामयिक मृत्यु से बचा जा सकता है।  

नरक चतुर्दशी

धनतेरस के दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी, रूप चौदस तथा काली चौदस भी कहते है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके 16,100 कन्याओं को नरकासुर के बंदीगृह से मुक्त कराया था| इसी दिन की मान्यता है कि सूर्योदय से पूर्व शरीर पर तेल तथा उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। जिससे सभी पाप नष्ट हो जाते है, तथा पुण्य कि प्राप्ति होती है| ऐसी भी मान्यता है, कि इस दिन सूर्योदय के पश्चात स्नान करने पर वर्षभर के शुभ कार्य नष्ट हो जाते हैं। नरक चतुर्दशी के साथ इस दिन को छोटी दिवाली के रूप में भी मनाते है तथा सायंकाल देवताओंकि पूजा के बाद  घरके बाहर  प्रत्येक स्थान पर दीपक जलाकर रखा जाता है|

दीपावली

पांच दिनों के त्योहारों का मुख्य दिन दीपावली पर्व होता है, यह त्योहार कार्तिक मास कि अमावस्या तिथि को मनाया जाता है| इस दिन माता लक्ष्मी तथा भगवान् गणेश की पूजा पूरे विधि विधान के साथ संपन्न की जाती है| क्षीर सागर के समुद्र मंथन से कार्तिक अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं, जिन्हें धन, ऐश्वर्य, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी कहा जाता है। अत: इस दिन मां लक्ष्मी के जन्मोत्सव के रूप में  दीप जलाए जाते हैं| तथा इसी दिन भगवान् रामचंद्र जी ने रावण का वध कर के माता सीता को रावण की कैद से मुक्त कराकर श्री राम, माता सीता तथा भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस आये थे| अयोध्या वासियो ने दिए जला कर स्वागत कर अपनी ख़ुशी दर्शायी थी | इसलिए दिवाली का त्योहार भगवान् श्री राम के अयोध्या वापस आने की ख़ुशी में मनाया जाता है| इस दिन घर पूर्णरूप से स्वच्छ करके प्रत्येक स्थान पर दीपक जलाये जाते है, जिससे घर में लक्ष्मी का वास हो| इस दिन 13 अथवा 26 दीपक जलाये जाते है और मध्य एक तेल का दीपक रखकर उसकी चारों बातियों को प्रज्वलित किया जाता है, लक्ष्मी पूजन के बाद एन दीपों को घर में प्रत्येक स्थान पर रखा जाता है तथा 4 बातियों वाले दीपक को रातभर जलाया जाता है, जिससे दरिद्रता का नाश होता है|

गोवर्धन पूजा

उत्सव के चौथे दिन कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट उत्सव मनाना जाता है| इस दिन घर के पशुओ को बैल, गाय, बकरी आदि को स्नान कराकर उनकी अच्छे से साज-सज्जा की जाती है, तथा घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है| दीप, दूध, दही, खील, खिलौना, मिठाई आदि से भोग लगाकर धूप एवं दीप से आरती की जाती है, तथा सायकॉल  गोवर्धन पर्वत का रूप देकर घर के बाहर दीपक जलाकर रखा जाता है| इस दिन को लेकर मान्यता है कि त्रेतायुग में जब इन्द्रदेव ने गोकुलवासियों से कुपित होकर मूसलधार वर्षा शुरू कर दी थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों  गोवर्धन पर्वत की तराई में रखकर वर्षा से रक्षा की थी तभी से इस दिन गोवर्धन पूजन की परंपरा का शुभारम्भ हुआ था|

भाई दूज

भाई दूज दिवाली पर्व का अंतिम त्योहार होता है,भाईदूज को यम द्वितीया भी कहते है| रक्षाबंधन की ही तरह भाईदूज का त्योहार भाई बहन के परस्पर स्नेह का त्योहार होता है| इस दिन घर के आंगन में भाईदूज की पूजा बनाकर दूध, दही, खील, खिलौना, मिठाई से पूजा कर धूप तथा दीप जलाकर सम्पन्न की जाती हैं| इसके बाद बहने भाई को तिलक लगाकर मिठाई खिलाती है, इस दिन भाईयो को बहन के घर जाकर उनके हाथ का बना भोजन करने से यश, धन, आयुष्य, धर्म एवं सुख की प्राप्ति होती है, तथा साथ में यमुना नदी में स्नान करना शुभ होता है भाई को अपनी सामर्थ्य के अनुसार बहन को आभूषण, वस्त्र, उपहार आदि  प्रदान कर आशीर्वाद लेना चाहिए।

भाईदूज के दिन को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है,कि यमदेव तथा यमुना जी भाई बहन थे, तथा बहन यमुना जी ने यम को आमंत्रित किया| यमदेव यमुना जी से मिलने  उनके घर आए और यमुनाजी ने उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया, एवं यह वचन लिया कि  प्रत्येक वर्ष वह  भोजन के लिए पधारेंगे। तथा जो बहन इस दिन अपने भाई को आमंत्रित करके  तिलक लगाकर  भोजन कराएगी, उसका भाई दीर्धायु होगा| तभी से भाई दूज की परम्परा का शुभारम्भ हुआ|