वकील कैसे बने | Advocate Kaise Bane | योग्यता | कोर्स | अधिकार

वकील को अभिभाषक, अधिवक्ता तथा अंग्रेजी में एडवोकेट भी कहते है | अधिवक्ता का कार्य अपने तथा दूसरो के अधिकारो के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ना होता है | अधिवक्ता के द्वारा कानून के सन्दर्भ में न्यायालय में किसी दूसरे व्यक्ति के स्थान पर दलील प्रस्तुत की जाती है, अधिकांश लोगो के पास अपनी बात प्रभावपूर्ण ढंग से सिद्ध करने की क्षमता, कौशल, ज्ञान तथा भाषा शक्ति नहीं होती है, इसलिए न्यायालय में अपना पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता या वकील की आवश्यकता होती है |

हमारे देश में बहुत से ऐसे लोग है, जो कानून से सम्बंधित जानकारी तथा शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखते है, जो अपने तथा दूसरो के अधिकार के लिए लड़ना चाहते है, ऐसे लोगो के लिए वकील या अधिवक्ता बनना इस क्षेत्र में बेहतर विकल्प है | आज आपको इस पृष्ठ पर “वकील या एडवोकेट कैसे बने? इसके लिए शैक्षिक योग्यता, आयुसीमा, अधिकार” के विषय में विस्तृत जानकरी उपलब्ध कराई गयी है |

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वकील की शैक्षिक योग्यता एवम आयुसीमा (Advocate Educational Qualification& Age Limit)

  • आपके पास इंटरमीडिएट उत्तीर्ण का प्रमाणपत्र होना चाहिए|
  • इंटरमीडिएट के बाद कानून की पढ़ाई करने के लिए आपके इंटरमीडिएट में 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है |
  • 3 वर्ष की वकालत की पढ़ाई के लिए स्नातक पास होना आवश्यक है |
  • यदि आप स्नातक के बाद वकालत की पढ़ाई करना चाहते है, तो स्नातक में 50 प्रतिशत अंक होना आवश्यक है |
  • कानून की पढ़ाई करने के लिए आपकी न्यूनतम आयु 20 वर्ष होनी चाहिए |

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वकील बनने के लिए कोर्स (Course to become a lawyer)

पाठ्यक्रमअवधि
एलएलबीतीन वर्ष
बीए एलएलबी (ऑनर्स)पांच वर्ष
बीएससी एलएलबी (ऑनर्स)पांच वर्ष
बीकॉम एलएलबी (ऑनर्स)पांच वर्ष
एलएलएम दो वर्ष

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एलएलबी क्या है (LLB Kya Hai)

एलएलबी एक बैचलर डिग्री होती है, इसका पूरा नाम बेचलर ऑफ़ लॉ होता है | एलएलबी में कानून के विषय में पढ़ाया जाता है, एलएलबी करने के लिए सबसे पहले आपको इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करना होता है, आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस विषयो के साथ आप वकालत की पढ़ाई कर सकते है | इंटरमीडिएट करने के बाद आप वकील बननें की पढाई करना चाहते है, तो इसके लिए आपको प्रवेश परीक्षा देना होता है|

आल इंडिया लेवल पर क्लैट (CLAT) अर्थात “कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट” में सम्मिलित हो सकते है | इस परीक्षा में सफल होनें के बाद आप लॉ कॉलेज में प्रवेश प्राप्त कर सकते है, यह पांच वर्ष का कोर्स होता है | इस प्रवेश परीक्षा में एक सामान्य परीक्षा होती है, इस परीक्षा में आपसे गणित, इंग्लिश, लॉजिकल रीजनिंग, लीगल एप्टी और जनरल अवेयरनेस से सम्बंधित सवाल पूछें जाते है |

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एलएलबी कोर्स के प्रकार (Types of LLB Course)

एलएलबी के कोर्स में दो प्रकार के पाठ्यक्रम होते है | इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद लॉ की शिक्षा प्राप्त करने के लिए 5 वर्ष के पाठ्यक्रम का अध्ययन करना होता है, तथा स्नातक के बाद यदि ला की शिक्षा ली जाती है तो यही पाठ्यक्रम 3 वर्ष का हो जाता है |

एलएलबी करने के साथ ही छात्र को किसी विशिष्ट विभाग में जैसे साइबर लॉ, फैमिली लॉ, बैकिंग लॉ, टैक्स लॉ, कॉरपोरेट लॉ, पेटेंट लॉ, क्रिमिनल लॉ,इंटरनेशनल लॉ, लेबर लॉ, रीयल एस्टेट लॉ इत्यादि की योग्यता प्राप्त करना होता है ताकि आगे जाकर उस विशेष विषय क्षेत्र को वकालत के लिए चुन सके |

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वकालत प्रशिक्षण (Law Internship)

लॉ की पढ़ाई समाप्त करने के बाद आपको वकालत, कोर्ट तथा कचहरी से सम्बंधित प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है | इसके लिए इंटर्नशिप करना आवश्यक होता है, इस इंटर्नशिप के तहत कोर्ट कचहरी से सम्बंधित जानकारी दी जाती है | कचहरी के काम कितने प्रकार के होते है? कोर्ट में दो वकील पक्ष तथा विपक्ष को लेकर कैसे बहस करते है? तथा कोर्ट में सुनवाई कैसे होती है? आदि के सम्बन्ध में सिखाया जाता है |

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स्टेट बार काउंसिल के लिए पंजीकरण (Enrollment for State Bar Council)

इंटर्नशिप करने के पश्चात आवश्यक होता है, आपका स्टेट बार काउंसिल में पंजीकरण करवाना | पंजीकरण होने के बाद आपको ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन की परीक्षा पास करना आवश्यक होता है | इस परीक्षा का आयोजन बार काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा किया जाता है |

इस परीक्षा को पास करने के बाद आपको वकालत करने के लिए सर्टिफिकेट प्राप्त हो जाता है | आप वकालत की प्रैक्टिस प्रारम्भ कर सकते है | इस प्रकार आपकी वकील बनने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है | इसके बाद यदि आप चाहे तो मास्टर इन लॉ (एलएलऍम) की पढ़ाई कर सकते है |

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ऑल इंडिया बार परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम (Syllabus for All India Bar Examination)

ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन की परीक्षा में 100 प्रश्न प्रश्नपत्र में होते है, जो बार काउंसिल द्वारा 3 एवं 5 वर्षीय एलएलबी के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम से पूछे जाते है तथा सभी प्रश्न बहुविकल्पीय होते है | परीक्षा की समय अवधि साढे तीन घंटे की होती  है | परीक्षा  में पूछे जाने वाले संपूर्ण पाठ्यक्रम को दो श्रेणी में विभाजित किया गया है, दोनों प्रकार की श्रेणी में संपूर्ण पाठ्यक्रम को 1 से 20 अध्याय के मध्य में विभाजित किया गया है | प्रथम श्रेणी  में 1 से 11 तक के अध्याय रखे गए हैं, तथा प्रत्येक अध्याय से सात प्रश्न पूछे जाते है|दूसरी श्रेणी में 12 से 20 अध्याय होते हैं, जिसमें से 23 प्रश्नों के उत्तर देने होते है| ऑल इंडिया बार काउंसिल परीक्षा नौ भाषाओं में होती है, जिनमें हिन्दी, तेलुगू, बंगाली, गुजराती, उडिया, तमिल, कन्नड, मराठी, और अंग्रेजी भाषा सम्मिलित है |

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वकालत के व्यवसाय में अन्य बेहतर विकल्प (Other Better Options in the Law of Advocacy)

  • इंटरनेशनल लॉयर (International Lawyer)

इस लॉ के अंतर्गत, दो राष्ट्रों के मध्य राष्ट्रीय हितों के लिए उत्पन्न होने वाली समस्याओं का कानून द्वारा निराकरण किया जाता है | यह लॉ का क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में रुचि रखनें वाले व्यक्तियो के लिए उपयुक्त है।

  • कॉरपोरेट लॉयर (Corporate Lawyer)

विभिन्न प्रकार के उद्योग व्यापार के अंतर्गत कर सम्बन्धी समस्याओं एवं अन्य प्रकार की समस्याओं का समाधान करना कॉरपोरेट लॉयर मुख्य कार्य है । कारॅपोरेट क्षेत्र में विशिष्ट योग्यता रखने वाले विशेषज्ञ की अधिक मांग है |

  • एन्वॉयरनमेंटल लॉयर (Environmental Lawyer)

एन्वॉयरनमेंट लॉ के अंतर्गत, प्रकृति के द्वारा प्राप्त हुयी वस्तुओ को नष्ट होनें से बचाने की बात की जाती है | ऐसे मामलों में बहुत बार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन दायर की जाती हैं, जिसके लिए एन्वॉयरनमेंटल लॉ में दक्ष लोगों की मांग होती है तथा एनजीओ में एन्वॉयरनमेंटल लॉयर की अधिक मांग होती है |

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  • साइबर लॉयर (Cyber Lawyer)

वर्तमान समय में ऑनलाइन तथा साइबर अपराध से सम्बंधित अनेक मामले सामने आये हैं | इसके अंतर्गत नकली और धमकी भरे ई-मेल भेजना, सॉफ्टवेयर की चोरी करना, एसएमएस हैकिंग करना, कंपनियों के साथ धोखा-धडी करना,मोबाइल की क्लोनिंग आदि सम्मिलित  हैं, बढ़ते साइबर क्राइम  मामलों के कारण कंप्यूटर और नेटवर्क सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा है |

  • पेंटेट एंड कॉपीराइट लॉयर (Patient & Copyright Lawyer )

पेटेंट के अंतर्गत किसी भी नई खोज से बनने वाले प्रोडक्ट पर एकाधिकार प्रदान किया  जाता है,  यदि किसी पार्टी को उत्पाद  बनाना है, तो इसके लिए पार्टी को लाइसेंस की आवश्यकता होती है, तथा उस उत्पाद पर रॉयल्टी देना पडता है | इस प्रकार इससे सम्बन्धित सभी कार्य को करने के लिए एक लायर के दिशा निर्देशन की आवश्यकता होती है |

  • लेबर लॉयर (Labor Lawyer )

लेबर लॉयर करियर के आधार पर बेहतर क्षेत्र है, कर्मचारियों और उनके अधिकार से सम्बंधित समस्याओं के समाधान के लिए लेबर लॉ बनाया गया है,  वर्तमान में इस क्षेत्र से सम्बंधित समस्याएं न्यायालय में  हैं | उच्चतम न्यायालय में नामांकित अधिवक्ता देश के किसी भी न्यायालय के सामने प्रतिपादन कर सकता है |

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अधिवक्ता या वकील के अधिकार (Rights of Advocate)

  • महाधिवक्ता मतलब जनरल एडवोकेट शासकीय पक्ष का प्रतिपादन करनें के लिए प्रमुख अधिकारी होता है |
  • वकील के द्वारा संपित्त सम्बन्धी, आपराधिक सम्बन्धी, संविधानिक सम्बन्धी तथा  परिवारिक विषयों आदि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती हैं|
  • अधिवक्ता को न्यायालय में किसी अन्य व्यक्ति की ओर से वाद का प्रतिपादन करने तथा दलील प्रस्तुत करने का अधिकार प्राप्त होता है,  इसका प्रयोग मुख्यत: कानून के सन्दर्भ में होता है, अधिकतर लोगों में  अपनी बात को प्रभावी ढ़ंग से कहनें की क्षमता, ज्ञान, कौशल, या भाषा-शक्ति नहीं होती है, जिस प्रकार अधिवक्ता द्वारा आवश्यकतानुसार उनकी बात को प्रभावी ढंग से रखने का अधिकार होता है |

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इस प्रष्ठ पर अधिवक्ता (Advocate) बनने के विषय में सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध करायी है, अब उम्मीद करता हू, आपको जानकारी पसंद आएगी |

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